अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर इस वक्त भारी दबाव देखने को मिल रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे गतिरोध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। नतीजतन, हाजिर सोने ने 4667 डॉलर के अहम सपोर्ट लेवल को तोड़ दिया है। शुरुआती दबाव के चलते यह 4626 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था, लेकिन मंगलवार को यह 1.6% टूटकर 4,605.18 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया। यह 6 अप्रैल के बाद का इसका सबसे निचला स्तर है। वहीं, जून डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी 1.6% की भारी गिरावट दर्ज की गई और यह 4,619.10 डॉलर पर पहुंच गया।
मीरा एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट प्रवीण सिंह के मुताबिक, बाजार की नजरें अब 4600 डॉलर के सपोर्ट पर टिकी हैं। अगर यह स्तर भी टूटता है, तो सोना 4500 या 4447 डॉलर तक गिर सकता है। फिलहाल इस पीली धातु के लिए 4668 और 4746 डॉलर पर रेजिस्टेंस देखा जा रहा है। कुल मिलाकर सर्राफा बाजार में अभी एक स्पष्ट दिशा का अभाव है और निवेशक काफी सतर्क नजर आ रहे हैं।
भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई का बढ़ता डर
दो महीने से चल रहे विनाशकारी युद्ध को सुलझाने के लिए ईरान ने हाल ही में एक नया प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव में विवादित हर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और परमाणु वार्ता को टालने जैसी बातें शामिल थीं। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस नए ईरानी प्रस्ताव से खुश नहीं हैं। अमेरिका के इस संशय और पाकिस्तान में वीकेंड पर हुई बातचीत के बेनतीजा रहने से फिलहाल शांति की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं।
इस बीच ऊर्जा संकट लगातार गहराता जा रहा है। हर्मुज जलडमरूमध्य के काफी हद तक बंद रहने के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। कच्चे तेल की यह तेज बढ़त सीधे तौर पर महंगाई को हवा दे रही है। विश्लेषक मेंके का मानना है कि बाजार इस वक्त वैश्विक विकास के धीमे होने से कहीं ज्यादा युद्ध के कारण सख्त होती मौद्रिक नीति को लेकर चिंतित है। महंगाई बढ़ने का सीधा मतलब है कि ब्याज दरों में कटौती टल सकती है, और ऊंची ब्याज दरें सोने जैसी गैर-उपज वाली संपत्तियों का आकर्षण कम कर देती हैं।
केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर टिकी निगाहें
इस हफ्ते दुनियाभर के प्रमुख केंद्रीय बैंकों की बैठकों का दौर जारी है, जो बाजार की चाल तय करेगा। बैंक ऑफ जापान ने सुबह के सत्र में हुई अपनी बैठक में ब्याज दरों को 0.75% पर स्थिर रखा है। हालांकि, नौ सदस्यीय बोर्ड के तीन सदस्यों ने दरें बढ़ाने के पक्ष में मतदान किया। बैंक ने अपने महंगाई के अनुमान को ऊपर की तरफ संशोधित किया है जबकि जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में कटौती की है। साथ ही अल्पकालिक नीतिगत दरों को बढ़ाने के एक प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है।
बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय बैठक खत्म हो रही है और उम्मीद है कि दरें स्थिर रखी जाएंगी। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी एनालिस्ट मानव मोदी बताते हैं कि यह बैठक बेहद अहम है क्योंकि जेरोम पॉवेल के नेतृत्व में यह फेड की आखिरी बैठक हो सकती है। इसके बाद केविन वॉर्श यह जिम्मेदारी संभालेंगे, जिससे बाजार में नीतिगत अनिश्चितता का एक नया पहलू जुड़ गया है। निवेशकों की नजरें यूरोपीय सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ कनाडा के आगामी फैसलों पर भी बनी हुई हैं।
डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है और 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड भी तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। इन सबके अलावा, अमेरिका के जीडीपी, एडीपी रोजगार आंकड़े, कंज्यूमर कॉन्फिडेंस और ड्यूरेबल गुड्स ऑर्डर जैसे अहम मैक्रो डेटा भी सोने की अगली दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
अन्य धातुओं और भारतीय बाजार की स्थिति
डॉलर की मजबूती और वैश्विक अनिश्चितता का असर सिर्फ सोने पर ही नहीं, बल्कि अन्य कीमती धातुओं पर भी साफ दिख रहा है। हाजिर चांदी 3.3% का भारी गोता लगाकर 72.98 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। प्लैटिनम 2.7% गिरकर 1,928.21 डॉलर और पैलेडियम 2.3% के नुकसान के साथ 1,442.41 डॉलर पर कारोबार कर रहा है।
अगर भारतीय बाजार के नजरिए से देखें, तो हालात बहुत उत्साहजनक नहीं हैं। मार्च महीने में भारत का सोने का आयात सालाना आधार पर 50% से अधिक घट गया है। भारतीय बाजार में भौतिक मांग में आई यह भारी गिरावट इस धातु के लिए एक साफ मंदी का संकेत दे रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।